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14 जून 2019

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन-अध्याय 75

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन-अध्याय 75

जैसे ही मेरे वचन बोले जाते हैं, ज़रा भी विचलन के बिना सब कुछ पूरा हो जाएगा। अब से आगे, सभी छिपे हुए रहस्यों को बिलकुल ही अस्पष्ट या गुप्त नहीं रखा जाएगा, और उन्हें तुम सभी के सामने प्रकट किया जाएगा—मेरे प्यारे पुत्रों। मैं तुम्हें और भी अधिक संकेतों और चमत्कारों को, यहाँ तक कि और भी बड़े रहस्यों को, मुझमें दिखाऊँगा। ये चीज़ें निश्चित रूप से तुम सभी को आश्चर्यचकित कर देंगी और तुम लोगों को मेरी, अर्थात सर्वशक्तिमान परमेश्वर की, एक बेहतर समझ प्रदान करेंगी, और तुम्हें उनमें निहित मेरी बुद्धि की सराहना करने देंगी। आज तुम सभी को उस सच्चे परमेश्वर के आमने सामने लाया गया है जिसे मनुष्य ने सृष्टि से लेकर अब तक कभी नहीं देखा है, और मेरे बारे में कुछ भी खास नहीं है। मैं तुम सब लोगों के साथ खाता हूँ, जीता हूँ, बोलता हूँ और हँसता हूँ, और मैं हमेशा तुम सभी के भीतर रहता हूँ, और इसके साथ ही, तुम सभी लोगों के बीच घूमता भी हूँ। उन लोगों के लिए जो विश्वास नहीं करते हैं या जिनकी अपनी गंभीर अवधारणाएँ हैं, यह मार्ग की एक बाधा है। यह मेरी बुद्धि है। मैं कुछ लोगों के लिए उन चीज़ों को भी प्रकट करूँगा जो मेरी सामान्य मानवता को ज्ञात नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं स्वयं परमेश्वर नहीं हूँ। इसके विपरीत, यह इसे साबित करने के लिए पर्याप्त है कि मैं ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ। जो लोग विश्वास करते हैं, उनके लिए इस बात का एक निर्णायक प्रभाव पड़ता है, और इस बात के कारण ही उनके पास मेरे बारे में एक सौ प्रतिशत निश्चितता है। अत्यधिक चिंतित मत बनो; मैं एक-एक करके चीज़ों को तुम्हारे लिए प्रकट करूँगा।

29 मई 2019

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन-अध्याय 58

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन-अध्याय 58

यदि तुम मेरा इरादा समझ जाओगे, तो तुम मेरे बोझ के प्रति विचारशील रह पाओगे और तुम रोशनी और प्रकाशन प्राप्त कर पाओगे, और रिहाई और स्वतंत्रता प्राप्त कर पाओगे, मेरे दिल को संतुष्ट कर पाओगे, तुम्हारे लिए मेरी इच्छा को पूरी होने दोगे, सभी संतों की नैतिक उन्नति को साथ ला पाओगे, और पृथ्वी पर मेरे राज्य को दृढ़ और स्थिर बना पाओगे। इस समय महत्वपूर्ण बात है मेरा इरादा समझना, यह वह मार्ग है जिसमें तुम लोगों को प्रवेश करना चाहिए और इससे भी अधिक वह कर्तव्य है जिसे हर व्यक्ति को पूरा करना चाहिए।
मेरा वचन अच्छी दवा है जो सभी प्रकार की बीमारियों को ठीक करता है। जब तक तुम मेरे पास आने के इच्छुक रहोगे, मैं तुम्हें चंगा करूँगा, और तुम्हें अपनी सर्वज्ञता की उपस्थिति देखने दूंगा, मेरे अद्भुत कर्मों को देखने दूंगा, मेरी धार्मिकता और महिमा को देखने दूंगा और इससे भी अधिक अपने दूषण और अपनी कमज़ोरियों को देखने दूंगा। मैं तुम्हारे भीतर की सभी स्थितियां समझता हूं; तुम हमेशा अपने दिल में चीज़ें करते हो और बाहर नहीं दिखाते हो। तुम्हारे द्वारा की जाने वाली हर चीज़ के बारे में मैं और भी स्पष्ट हूं। लेकिन तुम्हें पता होना चाहिए कि मैं किन चीज़ों की प्रशंसा करता हूं, और किन चीज़ों की प्रशंसा नहीं करता हूं; तुम्हें इन दोनों के बीच स्पष्ट रूप से अंतर करना चाहिए और तुम्हें इस पर लापरवाही से काम नहीं करना चाहिए।

27 मई 2019

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन-अध्याय 56

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन-अध्याय 56

मैंने उन लोगों को सज़ा देने का कार्य शुरू कर दिया है जो बुराई करते हैं, जो शक्ति का प्रयोग करते हैं, और जो परमेश्वर के पुत्रों पर अत्याचार करते हैं। अब से, जो भी अपने दिल में मेरा विरोध करता है, मेरे प्रशासनिक नियमों का हाथ हमेशा उसके ऊपर होगा। इसे जान लो! यह मेरे न्याय की शुरुआत है और किसी को भी कोई दया नहीं दिखाई जाएगी और कोई भी छोड़ा नहीं जाएगा, क्योंकि मैं भावावेश से रहित परमेश्वर हूँ जो धार्मिकता का पालन करता है; इसे पहचान लेना तुम सभी के लिए अच्छा होगा।
ऐसा नहीं है कि मैं उन लोगों को दंडित करना चाहता हूँ जो बुराई करते हैं, बल्कि यह उनकी खुद की बुराई से उन्हीं पर लाया गया प्रतिशोध है। मैं किसी को दंडित करने के लिए जल्दबाज़ी नहीं करता हूँ, न ही मैं किसी के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार करता हूँ—मैं सभी के प्रति धार्मिकता का आचरण करता हूँ। मैं निश्चित रूप से अपने पुत्रों से प्रेम करता हूँ और मैं निश्चित रूप से उन दुष्टों से नफ़रत करता हूँ जो मेरी अवहेलना करते हैं; मेरे कार्यों के पीछे यह सिद्धांत है। तुम लोगों में से प्रत्येक को मेरे प्रशासनिक नियमों के बारे में अंतर्दृष्टि होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होगा, तो तुम लोगों को ज़रा भी भय न होगा और तुम सब मेरे सामने लापरवाह रहोगे, और तुम्हें पता नहीं होगा कि मैं क्या सिद्ध करना चाहता हूँ, मैं किसे पूर्ण करना चाहता हूँ, मैं क्या हासिल करना चाहता हूँ या किस तरह के व्यक्ति की मेरे राज्य को आवश्यकता है।

18 अप्रैल 2019

दूसरा कथन


अध्याय 2

फ़िलाडेल्फ़िया के कलीसिया ने अपना आकार ले लिया है, और यह पूरी तरह से परमेश्वर के अनुग्रह और दया के कारण है। परमेश्वर के लिए संत अपना प्रेम लेकर आए और कभी भी अपने आध्यात्मिक मार्ग से डगमगाए नहीं। वे इस विश्वास पर दृढ़ हैं कि एकमात्र सच्चे परमेश्वर ने देहधारण किया है, कि वह ब्रह्मांड का मुखिया है जो सभी चीज़ों को नियंत्रित करता है—इसकी पुष्टि पवित्र आत्मा द्वारा की जा चुकी है और इसके लिए लोहे जैसे मज़बूत सबूत हैं! यह कभी नहीं बदल सकता!

17 अप्रैल 2019

पहला कथन


अध्याय 1

सिय्योन तक स्तुतियाँ पहुँची हैं और परमेश्वर का निवास स्थान प्रकट हुआ है। महिमावान पवित्र नाम की सभी लोगों द्वारा स्तुति की जाती है, और यह फैल रहा है। आह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर! ब्रह्मांड का मुखिया, अंत के दिनों का मसीह—वह जगमगाता सूर्य है, और पूरे ब्रह्मांड में प्रतापी और शानदार पर्वत सिय्योन पर उदित हुआ है ...

27 मार्च 2018

चौथा कथन


मेरे सभी लोगों को जो मेरे सम्मुख सेवा करते हैं अतीत के बारे में सोचना चाहिए कि: क्या मेरे प्रति तुम लोगों का प्रेम अशुद्धताओं से दागदार था? क्या मेरे प्रति तुम लोगों का प्रेम शुद्ध और सम्पूर्ण हृदय से था? क्या मेरे बारे में तुम लोगों का ज्ञान सच्चा था? मैंने तुम लोगों के हृदयों में मैंने कितना स्थान धारण किया? क्या मैंने उनकी सम्पूर्णता को भर दिया? मेरे वचनों ने तुम लोगों के भीतर कितना निष्पादित किया? मुझे मूर्ख न समझो! ये सब बातें मुझे पूर्णरूप से स्पष्ट हैं! आज, जैसे मेरी उद्धार की वाणी आगे कथन की जाती है, क्या मेरे प्रति तुम लोगों के प्रेम में कुछ वृद्धि हुई है? क्या मेरे प्रति तुम लोगों की निष्ठा का कुछ भाग शुद्ध हुआ है?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन-अध्याय 109

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन- अध्याय 109 मैं हर दिन कथनों को कह रहा हूँ, हर दिन बोल रहा हूँ, और हर दिन अपने महान संकेतों और चमत्कारों क...