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14 अग॰ 2018

स्वभाव का समाधान करना और सत्य का अभ्यास करना

1. मानवता और सत्य का अभ्यास करने की क्षमता के बीच सम्बन्ध
लोग कहते हैं कि सत्य का अभ्यास करना बहुत ही कठिन होता है। तो ऐसा क्यों है कि कुछ लोग सत्य का अभ्यास करने में समर्थ हैं? कुछ लोग कहते हैं यह इसलिए है क्योंकि वे सहज रूप में पवित्र आत्मा के कार्य को प्राप्त करते हैं जो वह उनके ऊपर कार्य कर रहा है, और साथ ही इसलिए क्योंकि वे स्वाभाविक रूप से अच्छे हैं। इस बहस में इसके प्रति थोड़ा सा तर्क तो है। कुछ लोग स्वाभाविक रूप से अच्छे होते हैं; वे सत्य का अभ्यास करने में समर्थ होते हैं। कुछ लोगों की मानवीयता कमज़ोर होती है, इस प्रकार उनके लिए सत्य का अभ्यास करना कठिन होता है; इसका अर्थ है कि वे कुछ दुखों का सामना करेंगे।

जो लोग सच्चाई से प्रेम करते हैं, उनके पास अनुसरण करने का एक मार्ग होता है

जो लोग सच्चाई से प्रेम करते हैं, उनके पास अनुसरण करने का एक मार्ग होता है

लोगों की स्थितियाँ सामान्य हैं या नहीं, यह इस पर निर्भर करता है कि वे सच्चाई से प्रेम करते हैं या नहीं
हुत से लोगों ने निम्नलिखित मुद्दे को उठाया है: उपरोक्त सहभागिता को सुनने के बाद, वे पूर्णतया स्पष्ट महसूस करते हैं, अधिक मजबूत हो जाते हैं, और उनमें नकारात्मकता की कोई भावना नहीं होती-लेकिन ऐसे हालात केवल करीब दस दिनों तक ही रहते हैं, जिसके बाद वे सामान्य स्थिति को बनाकर नहीं रख सकते। बसमस्या क्या है? क्या तुम लोगों ने कभी सोचा है कि यह किस कारण से होता है? शुरू के लगभग दस दिन में तुम्हारे हालात इतने अच्छे क्यों होते हैं? कुछ कहते हैं कि यह सत्य पर ध्यान केंद्रित नहीं करने का नतीजा है। लेकिन फिर सहभागिता को सुनने के बाद तुम इस स्तर की सामान्यता तक कैसे पहुँचे होगे? सच्चाई को सुनने के बाद तुम इतने खुश क्यों थे? कुछ लोग कहते हैं कि यह पवित्र आत्मा के काम के कारण है।

12 अग॰ 2018

अपनी प्रकृति को समझना और सत्य को व्यवहार में शामिल करना

 अपनी प्रकृति को समझना और सत्य को व्यवहार में शामिल करना

1. लोग अपनी स्वयं की प्रकृतियों को पूरी तरह से नहीं समझ पाते हैं

आप वर्तमान में अपनी स्वयं की कुछ परेशानियों के बारे में जानते हैं, आप उन भ्रष्टाचार के बारे में जानते हैं जो आमतौर पर आसानी से होते हैं, और उन चीजों को जानते हैं जिन्हें करना आपके लिए आसान है; हालांकि, सबसे अधिक कठिन चीज होती है अपने आप को नियंत्रित कर पाना। आप नहीं जानते कि कब क्या करेंगे और कौन सी गम्भीर चीज़ आप करेंगे। शायद ऐसी कोई चीज हो जिसके बारे में आपको लगता होगा कि आप वैसा कभी नहीं करेंगे, लेकिन किसी निश्चित समय या परिस्थिति में वह घटित हो जाता है; आपने वास्तव में ऐसा किया और कहा।

परमेश्वर की इच्छा को खोजना और यथासंभव सत्य का अभ्यास करना

परमेश्वर की इच्छा को खोजना और यथासंभव सत्य का अभ्यास करना

जैसे ही लोग अपने कर्तव्यों को पूरा करने में उतावले हो जाते हैं, वे नहीं जानते कि कैसे इसका अनुभव किया जाए; जैसे ही वे कामों में व्यस्त हो जाते हैं, उनकी आध्यात्मिक स्थितियाँ आकुल हो जाती हैं; वे एक सामान्य स्थिति को बनाकर नहीं रख पाते। ऐसा कैसे हो सकता है? यदि आप को थोड़ा कार्य करने दिया जाए, आप अपरम्परागत और स्वच्छंद हो जाते हैं, परमेश्वर के निकट होने की जगह उनसे दूर होते जाते हैं। इससे पता चलता है कि लोग नहीं जानते कि अनुभूति कैसे की जाए।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन-अध्याय 109

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन- अध्याय 109 मैं हर दिन कथनों को कह रहा हूँ, हर दिन बोल रहा हूँ, और हर दिन अपने महान संकेतों और चमत्कारों क...