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15 सित॰ 2018

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम" (भाग एक)

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "परमेश्वर का कार्य और मनुष्य का काम" (भाग एक)


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "जो कुछ मनुष्य देखता, अनुभव करता, और कल्पना कर सकता है उसे वह अभिव्यक्त करता है। भले ही ये सिद्धान्त या धारणाएं हों, इन सभी तक मनुष्य की सोच पहुंच सकती है। मनुष्य के कार्य के आकार की परवाह किए बगैर, यह मनुष्य के अनुभव के दायरे, जो मनुष्य देखता है, या जिसकी मनुष्य कल्पना या जिसका विचार कर सकता है उनसे बढ़कर नहीं हो सकता है।

7 सित॰ 2018

अंतिम दिनों के मसीह के कथन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (भाग तीन)

अंतिम दिनों के मसीह के कथन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (भाग तीन)

इस वीडियो में परमेश्वर के वचन "वचन देह में प्रकट होता है" पुस्तक से हैं। इस वीडियो की सामग्री: परमेश्वर मनुष्य के परिणाम को एवं उस मानक को कैसे निर्धारित करता है जिसके द्वारा वह मनुष्य के परिणाम को निर्धारित करता है


चमकती पूर्वी बिजली, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का सृजन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकट होने और उनका काम, परमेश्वर यीशु के दूसरे आगमन, अंतिम दिनों के मसीह की वजह से किया गया था। यह उन सभी लोगों से बना है जो अंतिम दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं और उसके वचनों के द्वारा जीते और बचाए जाते हैं।

28 अग॰ 2018

मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X सब वस्तुओं के जीवन का स्रोत परमेश्वर है (IV)" भाग तीन

मसीह के कथन "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X सब वस्तुओं के जीवन का स्रोत परमेश्वर है (IV)" भाग तीन


इस वीडियो में परमेश्वर के वचन "वचन देह में प्रकट हुआ से आगे जारी" पुस्तक से हैं। इस वीडियो की सामग्री:

3) परमेश्वर का अनुसरण करने वालों का जीवन और मृत्यु-चक्र

 Source From :सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया,वचन देह में प्रकट होता है से आगे जारी

2 अग॰ 2018

मसीह के कथन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (भाग चार के क्रम में)

मसीह के कथन "परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें" (भाग चार के क्रम में)


इस वीडियो में परमेश्वर के वचन "वचन देह में प्रकट हुआ से आगे जारी" पुस्तक से हैं। इस वीडियो की सामग्री: परमेश्वर की मनोवृत्ति को समझना और परमेश्वर के विषय में सभी गलत अवधारणाओं को छोड़ देना मनुष्य के परिणाम को कौन निर्धारित करता है लोग अनुभव के आधार पर परमेश्वर को परिभाषित करने के लिए प्रवृत्त होते हैं ऐसे लोगों के प्रति परमेश्वर की मनोवृत्ति जो उसके कार्य के दौरान भाग जाते हैं लोग जो परमेश्वर के कार्य के दौरान भाग खड़े होते हैं वे ऐसे लोग हैं जो सच्चे मार्ग को छोड़ देते हैं

1 मार्च 2018

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III


इन अनेक सभाओं ने प्रत्येक व्यक्ति पर एक बड़ा प्रभाव डाला है। अब तक तो, लोग वास्तव में परमेश्वर के सच्चे अस्तित्व का एहसास कर पाये होंगे और यह कि परमेश्वर वास्तव में उन के अति निकट है। यद्यपि लोगों ने बहुत सालों से परमेश्वर पर विश्वास किया है, फिर भी उन्होंने उसके विचारों और युक्तियों को सचमुच में कभी भी वैसा नहीं समझा है जैसा वे अब समझते हैं, और ना ही उन्होंने उसके व्यावहारिक कार्यों को सचमुच में वैसा अनुभव किया है जैसा वे अब करते हैं।

28 फ़र॰ 2018

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II


हमारी पिछली सभा के दौरान हमने एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय को आपस में साझा किया था। क्या तुम लोगों को स्मरण है कि वह क्या था? मुझे इसे दोहराने दो। हमारी पिछली सहभागिता का विषय था: परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर। क्या यह तुम लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है? इसका कौन सा भाग तुम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है? परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव या स्वयं परमेश्वर? तुम लोगों को किस में सबसे ज्यादा रूची है? तुम लोग किस भाग के विषय में सबसे अधिक सुनना चाहते हो? मैं जानता हूँ कि तुम लोगों के लिए इस प्रश्न का उत्तर देना कठिन है, क्योंकि परमेश्वर के स्वभाव को उसके कार्य के हर एक पहलु में देखा जा सकता है, और उसके स्वभाव को हमेशा उसके कार्य और सभी स्थानों में प्रकट किया गया है, और यह प्रभावकारी ढंग से स्वयं परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है; परमेश्वर की सम्पूर्ण प्रबंधकीय योजना में, परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव, और स्वयं परमेश्वर एक दूसरे से अलग नहीं हो सकते हैं।

24 फ़र॰ 2018

भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है


भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है

परमेश्वर ने देहधारण किया क्योंकि शैतान का आत्मा, या कोई अभौतिक चीज़ उसके कार्य का विषय नहीं है, परन्तु मनुष्य है, जो शरीर से बना है और जिसे शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया गया है। यह बिल्कुल ऐसा है कि क्योंकि मनुष्य की देह को भ्रष्ट किया गया है इसलिए परमेश्वर ने हाड़-मांस के मनुष्य को अपने कार्य का विषय बनाया है; इसके अतिरिक्त, क्योंकि मनुष्य भ्रष्टता का विषय है, उसने मनुष्य को अपने उद्धार के कार्य के समस्त चरणों के दौरान अपने कार्य का एकमात्र विषय बनाया है। मनुष्य एक नश्वर प्राणी है, और वह हाड़-मांस एवं लहू से बना हुआ है, और एकमात्र परमेश्वर ही है जो मनुष्य को बचा सकता है।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन-अध्याय 109

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन- अध्याय 109 मैं हर दिन कथनों को कह रहा हूँ, हर दिन बोल रहा हूँ, और हर दिन अपने महान संकेतों और चमत्कारों क...