12 जून 2019

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन-अध्याय 73

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन-अध्याय 73

मेरे वचन बोलते ही तुरंत पूरे हो जाते हैं; वे कभी नहीं बदलते और पूरी तरह से सही होते हैं। इसे याद रखो! मेरे मुंह से निकले हर वचन और हर बात पर सावधानी से विचार किया जाना चाहिए। विशेष रूप से सावधान रहो, ताकि तुम्हें नुकसान न पहुँचे और तुम्हें मेरे न्याय, क्रोध और ताप को न सहना पड़े। मेरा कार्य अब बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन यह अपरिष्कृत नहीं है और यह कुछ हद तक नाजुक है—यह नग्न आँखों के लिए लगभग अदृश्य है और मनुष्य के हाथों से छुआ नहीं जा सकता है। यह विशेष रूप से नाजुक है। मेरे वचन कभी खाली नहीं होते और सारे सच होते हैं। तुम्हें विश्वास करना चाहिए कि हर वचन सत्य और सटीक है। लापरवाह न बनो; यह अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण है! इसी पल में आशीर्वाद या दुर्भाग्य निहित है। इनका अंतर स्वर्ग और पृथ्वी की तरह है। तुम स्वर्ग में जाओगे या नरक में, यह पूरी तरह से मेरे नियंत्रण में है। नरक को जाने वाले लोग अपनी मृत्यु के समय के अंतिम संघर्ष में प्रवृत्त हैं, जबकि स्वर्ग में जाने वाले लोग अपनी पीड़ा के आख़िरी दौर में हैं और मेरे लिए अंतिम बार खप रहे हैं, और भविष्य में वे जो कुछ भी करते हैं, वह आनंद लेना और प्रशंसा करना है, उन सभी छोटी छोटी चीजों के बिना जो लोगों को परेशान करती हैं (शादी, काम, कष्टप्रद धन, हैसियत, इत्यादि)। लेकिन नरक में जाने वाले लोगों की पीड़ा हमेशा के लिए होती है (यह बात उनकी भावना, आत्मा और शरीर को संदर्भित करती है), वे कभी भी मेरे दंड देने वाले हाथ से बच नहीं सकते। ये दोनों पक्ष अग्नि और जल की तरह असंगत हैं। यहाँ कोई उलझन नहीं है: जो लोग दुर्भाग्य का सामना करते हैं, वे दुर्भाग्य से पीड़ित होते रहेंगे, जबकि जो लोग धन्य हैं वे जी भर के आनंद लेंगे।
सभी घटनाएँ और चीज़ें मेरे द्वारा नियंत्रित होती हैं, यहाँ हमें इसका उल्लेख करने की ज़रुरत नहीं है कि तुम लोग—मेरे पुत्रों, मेरे प्यारों—विशेष रूप से मेरे अपने हो। तुम लोग मेरी 6,000 साल की प्रबंधन योजना के निचोड़ हो, मेरे खजाने हो। वे सभी जिन्हें मैं प्यार करता हूँ, मेरी आँखों को भाते हैं, क्योंकि वे मुझे प्रकट करते हैं; जिन लोगों से मैं नफ़रत करता हूँ, उनकी ओर देखे बिना ही वे मुझे बुरे लगते हैं, क्योंकि वे शैतान के वंशज हैं और शैतान से सम्बन्ध रखते हैं। आज, हर किसी को खुद की जाँच करनी चाहिए: यदि तुम्हारे इरादे सही हैं और तुम वास्तव में मुझसे प्यार करते हो, तो तुम निश्चित रूप से मेरे प्यार को पाओगे। तुम्हें मुझसे सच्चा प्यार करना चाहिए और मुझे धोखा नहीं देना चाहिए! मैं वो परमेश्वर हूँ जो लोगों के अंतरतम दिलों की जांच करता है! यदि तुम्हारे इरादे गलत हैं और तुम मेरे प्रति उदासीन और विश्वासघाती हो, तो तुम निश्चित रूप से मेरे द्वारा घृणित होगे और तुम मेरे द्वारा चुने गए या पहले से निर्धारित किये गए नहीं थे। तुम बस नरक में जाने का इंतजार करो! संभव है कि अन्य लोग इन चीज़ों को देखने में सक्षम न हों, लेकिन केवल तुम और मैं—वो परमेश्वर जो लोगों के अंतरतम दिलों की जांच करता है—उन्हें जानते हैं। वे चीज़ें एक निश्चित समय पर प्रकट की जाएँगी। जो ईमानदार हैं उन्हें चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है और जो लापरवाह हैं केवल उन्हें ही डरने की आवश्यकता है। यह सब मेरी बुद्धिमत्तापूर्ण योजना का हिस्सा है।
यह कार्य ज़रूरी और दूभर है, और तुम सभी को इस निर्णायक कार्य को पूरा करने के लिए एक अंतिम बार मेरी खातिर खपने की आवश्यकता है। मेरी अपेक्षाएँ ऊँची नहीं हैं: मुझे केवल यह आवश्यकता है कि तुम सब मेरे साथ बहुत अच्छी तरह समन्वय करने में सक्षम हो सको, हर बात में मुझे संतुष्ट करो, अपने अंदर मेरे मार्गदर्शन का पालन करो। अंधे मत बनो; एक लक्ष्य को रखो, और सभी पहलुओं से और सब बातों में मेरे इरादों को महसूस करो। ऐसा इसलिए है क्योंकि तुम सभी के लिए मैं अब और एक गुप्त परमेश्वर नहीं हूँ। मेरे इरादों को समझने के लिए तुम्हें इसके बारे में बहुत स्पष्ट होना चाहिए। बहुत ही कम समय में, तुम लोग न केवल उन विदेशी लोगों से मिलोगे जो सही मार्ग को खोजते हैं, बल्कि और भी महत्वपूर्ण बात यह है कि तुम सब में उनकी चरवाही करने की क्षमता होनी चाहिए। यह मेरा आग्रहपूर्ण इरादा है। अगर तुम इसे नहीं देख पाते हो, तो बात नहीं बनेगी। बहरहाल, तुम्हें मेरी सर्वशक्तिमत्ता में विश्वास करना चाहिए। जब तक लोग सही हैं, मैं निश्चित रूप से उन्हें अच्छे सैनिक बनने के लिए प्रशिक्षित करूँगा। सब कुछ मेरे द्वारा उचित रूप से व्यवस्थित कर दिया गया है। तुम सभी को मेरे लिए कष्ट सहन करने की चाह रखनी चाहिए। यह अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण है। इसे खोना नहीं! मैं तुम लोगों के अतीत की बातों को याद नहीं रखूँगा। तुम्हें अक्सर प्रार्थना करनी चाहिए और मुझसे आग्रह करना चाहिए; तुम्हारे आनंद और उपभोग के लिए मैं तुम्हें पर्याप्त अनुग्रह प्रदान करूँगा। अनुग्रह और आशीर्वाद एक ही नहीं हैं। अभी तुम जिसका आनंद ले रहे हो, वह अनुग्रह है और यह मेरी दृष्टि में उल्लेखनीय नहीं है; जबकि आशीर्वाद वो होते हैं जिनका तुम भविष्य में असीम रूप से आनंद लोगे। वे वो आशीषें हैं जिनके बारे में लोगों ने न कभी सोचा है न ही जिनकी वे कल्पना भी कर सकते हैं। मैं इसीलिए कहता हूँ तुम लोग धन्य हो—सृष्टि के बनने से लेकर आज तक मनुष्य ने कभी इस आशार्वाद का आनंद नहीं लिया है।
मैंने पहले ही तुम सभी के सामने मेरा सब कुछ प्रकट कर दिया है। मैं केवल यही उम्मीद करता हूँ कि तुम लोग मेरे ह्रदय के प्रति विचारशील हो सको, हर बात में मेरे बारे में सोच सको, और सभी बातों में मेरा ध्यान रख सको, ताकि जिन्हें मैं हमेशा तुम्हारे मुस्कुराते हुए चेहरे देखता रहूँ। इसके बाद से, जो लोग ज्येष्ठ पुत्र की स्थिति प्राप्त करते हैं वे वो लोग होंगे जो मेरे साथ राजाओं के रूप में शासन करेंगे। उन्हें किसी भी भाई द्वारा धमकाया नहीं जाएगा, न ही उन्हें मेरे द्वारा प्रताड़ित किया या निपटाया जाएगा, क्योंकि चीज़ों को करने का मेरा सिद्धांत यह है: ज्येष्ठ पुत्र के समूह में जो लोग हैं, उन्हें दूसरों के द्वारा तुच्छ समझा गया और धमकाया गया है और उन्होंने जीवन के सभी विचलनों का सामना किया है। (मैं उनके साथ पहले ही निपट चुका हूँ और उन्हें तोड़ चुका हूँ और उन्हें पहले ही परिपूर्ण कर चुका हूँ)। ये लोग पहले ही मेरे साथ उन आशीर्वादों का आनंद ले चुके हैं जो उन्हें पहले ही हासिल कर लेने चाहिए। मैं धार्मिक हूँ और किसी के भी प्रति पक्षपाती नहीं हूँ।

स्रोत: सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-वचन देह में प्रकट होता है

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