Best Hindi Christian Song 2018 | "परमेश्वर के देहधारण का अधिकार और मायने"
किया नहीं समर्पण जिन्होंने कभी, टेकते हैं घुटने समक्ष परमेश्वर के,
जब होता है सामना उसके वचन से।
झुकते हैं उसके वचन के न्याय के आगे,
करते नहीं छानबीन या परख कभी अपनी ज़बाँ से।
प्रकट होता है परमेश्वर देह में सामान्य मानव की तरह,
मगर देखता है इंसान उसका अधिकार पूरा उसके वचन में।
वो स्वयं परमेश्वर है, उसी की अभिव्यक्ति है उसके वचन में।
कर सकता नहीं कोई अपमान उसका, वो परमेश्वर है देह में।
देहधारी परमेश्वर व्यक्त करता है अपने वचन,
ताकि सुन सकें और कर सकें ग्रहण न्याय उसका सभी।
रूह के रूप में आकर समर्पण के लिये इंसान को, परमेश्वर डराता नहीं।
इस सच्चे और अपूर्व कार्य से उजागर होता है,
असली स्वभाव इंसान का, जो गहरा दबा होता है,
ताकि पहचानकर बदले इसे इंसान।
न्याय परमेश्वर का है व्यवहारिक और पहुँचता है ज़रिये वचन के।
परमेश्वर के देहधारण का अधिकार और मायने यही है।
परमेश्वर के देहधारण का अधिकार और मायने यही है।
उसके वचन के न्याय के परे कोई जाता नहीं,
और अंधेरा कोई उसके अधिकार पर व्याप्त होता नहीं।
इंसान होता है समर्पित, उसके देहधारण, अधिकार
और वचन के न्याय की वजह से।
उसके देहधारण, अधिकार और वचन के न्याय की वजह से।
"वचन देह में प्रकट होता है" से